आलसी का भाग्य

आलसी का भाग्य – पहले समय में यूरोप के एक देश ‘चैक’ में एक गरीब आदमी रहता था । उसके तीन बेटे थे । दो बड़े बेटे तो बहुत समझदार थे, किंतु तीसरा बेटा इयान थोड़ा कम होशियार था । वह अक्सर भट्‌टी के पास बैठा रहता था । लोग मजाक में उसे भट्‌टी झांकने वाला कहते थे ।

(चैक पहले अपने पड़ोसी देश स्तोवाकिया के साथ सम्मिलित था । अत: दोनों देश मिलकर चैकस्तोवाकिया कहलाते थे ।) एक दिन उसके पिता नेउससे कहा : “अब तुम बड़े हो गए हो । घरकी हालत तुम लोग जानते ही हो । अब तुम सब अपना-अपना कारोबार करो ।”

दूसरे दिन वे तीनों भाई घर से निकल पड़े । चलते-चलते वे एक चौराहे पर जाकर खड़े हो गए । कुछ देर बाद दोनों बड़े भाई सामने की ओर चल पड़े । जाते-जाते वे अपने छोटे भाई से बोले : ”तुम उधर चले जाओ । तुम्हारे लिए सबसे अच्छा रास्ता वही है ।” वे इशारा करके आगे बढ़ गए ।

इयान उसी रास्ते पर चल पड़ा । जंगलों से होताहुआ वह एक मैदान में पहुंचा । वहां तीन पेड़ खड़े थे । उसने पहले कभी वैसे पेड़ नहीं देखे थे । वह पेड़ोंके नीचे बैठ गया । थोड़ी देर बाद उसे पेड़ोंके पीछे एक चट्‌टान दिखाई दी । वह उठकर उस चट्‌टान के पास पहुंचा । वहा उसने चट्‌टान में एक छोटा-सा दरवाजा देखा ।

कुछ झिझकता हुआ वह उस दरवाजे में पुस गया । अंदर पहुचा तो उसे एक महल दिखाई दिया । इयान उस महल में चला गया । वह अंदर पहुंचा तो उसे एक राजकुमारी दिखाई दी । राजकुमारी ने उसका स्वागत किया । उसने कहा : ”इयान! मैं बहुत दिनों से तुम्हारा इंतजार कर रही थी ।

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मुझे यकीन था कि तुम एक दिन यहां जरूर आओगे ।” इयान हैरान था । वह मन-ही-मन सोचने लगा : ‘यह राजकुमारी मेरा नाम कैसे जानती है ?’ राजकुमारी ने इयान को भोजन कराया । खाना खाकर वह सो गया । सुबह उसकी आख खुली तो उसने देखा, राजकुमारी नाश्ता लिए उसकी प्रतीक्षा कर रही है ।

नाश्ता करने के बाद इयान ने कहा : ”तुमने मेरी बहुत सेवा की है । बताओ, मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूं ?” राजकुमारी बोली : ‘इस चट्‌टान के बाहर तीन पेड़ खड़े हुए हैं । तुम उन पेड़ों को जड सहित गिरा दो । फिर तुम जो कुछ मांगोगे, मैं तुम्हें वही दे दूंगी ।’

इयान ने कहा : ”ऐसा ही होगा ।” यह कहकर वह महल से बाहर निकल गया । वह पेड़ों को काटने में जुट गया । कई दिन तक लगातार काम करने के बाद उसने उन तीनों पेड़ों को काट डाला । फिर वह राजकुमारी के पास पहुंचा ।

राजकुमारी ने इयान से कहा : ”तुम उन पेड़ों की लकड़ियों को इकट्‌ठा कर लो और उनमें अण लगा दो ।” इयान ने ऐसा ही किया । उसने लकड़ियां इकट्‌ठी करके आग के हवाले कर दी । वह थक गया था, इसलिए थोड़ी दूर जाकर जमीन पर पड़कर आराम करने लगा । तुरत ही उसे नींद ने आ घेरा ।

अगले दिन उसकी नींद टूटी तो उसने स्वयं को एक सुंदर कमरे में पाया । उसके शरीर पर सुंदर कपड़े थे । अनजानी जगह देखकर वह घबरा गया । तभी वहां एक नौकर आया । उसने इयान से पूछा : ”मालिक! किसी चीज की आवश्यकता हो तो आप मुझे आदेश दें ।”

इयान आश्चर्यचकित था । यह क्या हो रहा है ? तभी तीन युवक राजसी वस्त्र और आभूषण लेकर उसके पास पहुंच गए । उन्होंने इयान को राजसी वस्त्राभूषण पहनाए । अब इयान किसी राजकुमार जैसा लगने लगा, तभी दरवाजा खुला और पांच-छ: सुँदर राजकुमारियां वहां आ पहुंची ।

उन्होंने इयान को धन्यवाद दिया और कहा : ”आप हममें से किसी भी एक राजकुमारी के साथ अपना विवाह कर सकते हैं ।” इयान असमंजस में था । सभी सुंदर थीं । किसके साथ करे वह अपना विवाह ? फिर वह बोला : ”मैं उसी राजकुमारी के साथ विवाह करूंगा, जिसने मेरी सेवा की थी ।

इस पर वह राजकुमारी तो वहीं रह गई, शेष राजकुमारियां कमरे से बाहर चली गईं ।” राजकुमारी ने इयान को बताया कि उन तीन पेड़ों की वजह से ही उनका सारा राज्य शापग्रस्त था । पेड़ों के गिरते ही वे शाप से मुक्त हो गए हैं । इयान और राजकुमारी का विवाह धूमधाम से संपन्न हो गया ।

इयान वहां का राजा बन गया । एक दिन इयान ने सोचा-माता-पिता और भाइयों से मिलने के लिए मुझे अवश्य जाना चाहिए ।’ यह सोचकर वह अपनी रानी के साथ रथ में बैठकर अपने गांव को चल दिया । सैनिक भी उसके साथ थे ।

जैसे ही राजा इयान का रथ गांव के निकट पहुंचा तो गाव वालों ने राजा का स्वागत किया । एक स्त्री की आखों में आसू देखकर इयान ने उससे पूछा : “मां ! क्या बात है ? आपकी आखों में औसू क्यों हैं ?” स्त्री ने उत्तर दिया : ”महाराज! मेरा सबसे छोटा बेटा बहुत दिन से घर नहीं लौटा है ।

पता नहीं वह कहां और किस हाल में है । मुझे उसकी ही चिंता खाए जा रही है । उसे याद करते ही मेरी आखों में आंसू आ गए ।” राजा इयान ने कहा : ”मां! आप चिंता मत कीजिए । आपका बेटा अवश्य वापस  आएगा ।” कहकर वह आगे बढ़ गया । स्त्री अपने घर को चली गई ।

गांव वालों को बिल्लु पता न था कि उस स्त्री का खोया हुआ बेटा इयान उसके सामने राजा बना खड़ा है । भीड़ में इयान ने अपने घर वालों को देखते ही पहचान लिया था । इयान जिन कपड़ों को पहनकर घर से गया था, वह उन कपड़ों को अपने साथ लाया था ।

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वह उन्हीं कपड़ों को पहनकर अपनी मां से मिलने को गया । इयान को देखते ही उसकी मां खुशी से धूम उठी । उसने इयान को अपने गले से लगा लिया । इयान ने मां से कहा कि अभी वह उसके दोनों बड़े भाइयों को इस बारे में कुछ न बताए ।

थोड़ी देर बाद उसके दोनों बड़े भाई घर आए । उन्होंने इयान से कहा : ”अभी-अभी हमने राजा को गांव में आते देखा था । तुम थोड़ी देर पहले आ जाते तो तुम भी राजा को देख लेते ।” इयान घर वालों से विदा लेकरराजा से मिलने के लिए चल दिया । भाइयों ने सोचा : ‘यह मूर्ख है । पता नहीं, राजा से क्या कह बैठे ?’

यह सोचकर वे उसके पीछे-पीछे चल पड़े । भाइयों ने जब देखा कि इयान रनिवास की ओर जा रहा है तो वे चौंके । तुरंत उन्होंने आगे बढ्‌कर इयान को अंदर जाने से रोका । बड़ा भाई उससे बोला : ”इयान ! इधर तुम कहां जा रहे हो ? राजा को मालूम हो गया तो तुम्हारी खैर नहीं ।

तुम भट्‌टी के पास ही बैठो । यहां तुम्हारा क्या काम ?” इयान फिर भी न माना तो वे उसे जबरदस्ती रोकने लगे । सैनिकों ने जब यह देखा तो उन्होंने इयान के भाइयों को वहा से हटाकर एक तरफ कर दिया । एक सैनिक बोला : ”तुम लोग राजा पर हाथ उठा रहे हो । पागल तो नहीं हो गए ?”

इयान के भाई आश्चर्यचकित थे । वे इयान की ओर देखने लगे । तभी इयान के माता-पिता भी वहां आ गए । इयान मुस्करा रहा था । इसके बाद इयान ने पेड़ काटने से लेकर राजा बनने तक की कहानी सबको सुनाई । लोग इयान की जय-जयकार करने लगे । अब वह अपने घर वालों के साथ महल में आराम से रहने लगा ।

शिक्षा:

इस संसार में प्रत्येक व्यक्ति को उतना ही मिलता है ? जितना उसके भाग्य में लिखा होता है । कहते हैं कि वक्त से पहले और भाग्य से ज्यादा कभी कोई चीज नहीं मिला करती । अत: हम कर्मशील तो अवश्य रहें, किंतु फल की चिंता छोड़ दो । देने वाला प्रमु है । वही सबको व्यक्ति के कर्मों के अनुसार उसका प्रतिफल देता है ।

By Ruchi

Ruchi is an impassioned motivational writer dedicated to inspiring individuals to unlock their fullest potential and embrace a life of purpose, positivity, and fulfillment. With a profound belief in the transformative power of words, she crafts compelling narratives that ignite hope, instill courage, and spark meaningful change in the lives of her readers.

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