बेला की महकबेला की महक

वह दूध जैसी सफेद थी । सफेद रंग के ही रेशमी कपड़े पहनती थी और चांदनी रात में ही बाहर निकला करती थी । जब वह हवा में उड़ती थी तो आस-पास के लोगों को बेला के फूलों की सुगंध आती थी । लोग उसे बेला परी कहते थे ।

नगर के राजा का नाम था जमदग्नि । प्रजा उसका बहुत आदर करती थी । वह भी हमेशा प्रजा का बहुत ख्याल रखता था । समय-समय पर प्रजा में खाने की वस्तुएं, कपड़े आदि बंटवाया करता था । एक दिन राजा को उदास देखकर उसके मंत्री ने उसकी उदासी का कारण पूछा ।

राजा ने बताया : ”रात को सपने में मुझे बेला परी दिखाई दी थी । उसने मुझ पर स्वार्थी होने का आरोप लगाया, लेकिन इससे पहले कि मैं कुछ कह पाता, वह गायब हो गई ।”  मंत्री ने कहा : ”महाराज! सपने तो सपने होते हैं ।

सारी प्रजा आपकी उदारता का गुणगान करती राजा को मंत्री का उत्तर सुनकर भी संतुष्टि नहीं हुई उन्होंने मन-ही-मन निश्चय किया कि वह बेला परी से मिलकर उसकी बात की सच्चाई जानकर रहेगा । कुछ समय पश्चात सुकल पक्ष आया तो राजा अपने मंत्री के साथ घोड़े पर सवार होकर जंगल की ओर चल दिया, क्योंकि बेला परी रात में ही बाहर निकलती थी ।

राजा और मंत्री दोनों को जंगल में भटकते-भटकते चौदह दिन व्यतीत हो गए । शुक्ल पक्ष का केवल एक ही दिन बाकी रह गया था, इसलिए वे दोनों उदास होकर झील के किनारे एक पेड़ के नीचे जा बैठे । ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी । खिली हुई चांदनी में झील का पानी मोतियों जैसा झिलमिला रहा था । वातावरण शांत था । मंत्री को बातें करते-करते नींद आ गई हे, लेकिन राजा जागता रहा ।

थोड़ी देर बाद राजा ने देखा कि चांदी की एक डोर झील में लटक रही है । उस डोर को पकड़कर सफेद रंग की एक परी तेजी से नीचे उतरती दिखाई दी । उसके पंख हिलने के कारण आस-पास तेज हवा चलने लगी ।

राजा जन्मदिन उसे देखते ही समझ गए कि यह वही बेला परी है, जो उन्हें सपने में दिखाई दी थी । बेला परी की सुंदरता देखकर राजा भौचक्का रह गया । वह दम साधकर उसे निहारने लगा । मन में विचार करने लगा कि कैसे वह इस परी से बात करे ?

परी ने अपने पंख उतारकर झील के किनारे रख दिए और शांत भाव से झील के जल में तैरने लगी । राजा को अचानक एक उपाय सूझा । जब परी ने झील के जल में डुबकी लगाई तो वह तेजी से लपककर परी के पख उठा लाया ।

परी नहाकर बाहर निकली तो अपने पख न पाकर बहुत परेशान हुई । वह बिना पंखों के उड़ नहीं सकती थी । बाद में परी ने देखा कि उसके पंख राजा के पास हैं, तब वह राजा से अपने पंख वापस कर देने के लिए प्रार्थना करने लगी ।

राजा ने कहा : “सुंदर परी! मैं दो शर्तों पर तुम्हारे पंख वापस कर सकता हूं । पहली शर्त यह हे कि तुम प्रतिदिन मुझसे मिलने के लिए आया करोगी । दूसरी शर्त यह है कि तुम्हें सिद्ध करना होगा कि मैं स्वार्थी हूं ।” बेला परी ने राजा की बात मान ली, लेकिन उसने भी अपनी दो शर्तें रखी ।

पहली यह कि वह केवल सुबल पक्ष में ही उससे मिलने आया करेगी । दूसरी यह कि राजा को उससे एक कहानी सुननी पड़ेगी । राजा जमदग्नि ने भी उसकी दोनों शर्तें मान ली । अब बेला परी ने कहानी सुनानी शुरू की । “एक शिकारी अपने कुत्ते के साथ जंगल में शिकार करने गया ।

जब वह वापस लौट रहा था तो रास्ते में उसे एक टूटी हुई बैलगाड़ी मिली । बैलगाड़ी में सोने की सिल्लियां और चांदी की छड़ियां लदी हुई थी । गाड़ीवान पास में ही उदास बैठा था । शिकारी को देखकर गाड़ीवान ने कहा- ‘मेरी गाड़ी का पहिया खराब हो गया है ।

मुझे गांव जाकर बढ़ई को लाना होगा । क्या तब तक तुम मेरी गाड़ी की रखवाली करोगे ?” शिकारी मान गया । गाड़ीवान बढ़ई की खोज में गाव की ओर चला गया । शिकारी और उसका कुत्ता गाड़ी की निगरानी करने लगे । काफी देर हो गई । अंधेरा होने लगा, लेकिन गाड़ीवान न लौटा ।

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शिकारी को अपने घर जल्दी लौटना था, क्योंकि उसकी मा को दिखाई नहीं देता था और वह बीमार भी थी । उसे मां के लिए खाना भी बनाना था । शिकारी ने अपने कुत्ते से कहा : ‘तुम गाड़ी की रखवाली करना । जब तक गाड़ीवान न आ जाए, तब तक कहीं मत जाना । मैं घर जा रहा हूं ।’

कुत्ता पूरी चौकसी से गाड़ी की रखवाली करने लगा । वह गाड़ी के चारों ओर चक्कर लगाने लगा, ताकि बैल कहीं दूर न चले जाए । आधी रात के करीब गाड़ीवान एक बढई को लेकर आया । गाड़ीवान ने जब यह देखा कि उसका सोना-चांदी ज्यों-का-त्यों सुरक्षित रूप से गाड़ी में लदा है तो वह बहुत खुश हुआ ।

इनाम के तौर पर उसने चांदी की पाँच छड़ियां कुत्ते को दे दीं । कुत्ता सुबह होते-होते घर लौटा । शिकारी ने देखा कि कुत्ते के मुँह में छड़ियां हैं । उसने सोचा कि कुत्ता यह छड़ियां चुरा लाया है । तब उसने वे छुट्टियां कुत्ते के मुंह से निकाली और उस पर वार कर दिया । कुत्ता बेचारा वहीं ढेर हो गया ।”

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इतना कहकर बेला परी चुप हो गई । राजा ने पूछा : ”आगे क्या हुआ ?” परी बोली : ”अब आगे सुनाने को रह ही क्या गया है । बेचारे उस स्वामिभक्त कुत्ते को शिकारी ने मार डाला और तुम्हारे मुह से ‘आह!’ तक न निकली । फिर भी तुम अपने आपको दयालु और परोपकारी समझते हो ।”

राजा को लगा कि उनसे कहीं कुछ गड़बड़ हो गई है । इतने में उनका मंत्री भी वहां आ चुका था । मंत्री ने बेला परी को जवाब दिया : ”लेकिन हमारे राजा जो दान देते हैं, अकाल पड़ने पर लगान माफ करते हैं, उसमें उनका क्या स्वार्थ है ?”

बेला परी ने कहा : ”उसमें स्वार्थ है । राजा को मालूम है कि यदि उन्होंने लगान माफ नहीं किया तो उनके राज्य में अशांति फैल जाएगी ।” राजा को बेला परी की बात ठीक लगी । उस दिन उन्होंने निश्चय किया कि अब वह दान के बदले लोगों को काम देगा ।

फिर राजा ने वैसा ही किया । कुछ ही वर्षों में राज्य में खूब खेती होने लगी ।  कोई बेरोजगार और भूखा न रहा । राजा ने नगर में जगह-जगह बेला फूल के पौधे लगवाए । नगर बेला की सुगंध से हमेशा सुगंधित रहने लगा ।

By Rani

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