पर्मेस्वर का संदेश

बहुत समय पहले की बात है, तब मनुष्य और जानवर आपस में लड़ते नहीं थे । संसार बहुत ही अद्‌मुत था । पहाड़ों से मीठे झरने बहते थे । धरती बहुत उपजाऊ थी । खाने-पीने की चीजों की कोई कमी नहीं थी । दूध-दही की नहि, बहती थी । फल और फूलों से धरती सजी रहती थी ।

भगवान पहाड़ों की सबसे ऊंची चोटी पर निवास करते थे । वहा मानव का जाना मना था । भगवान अपनी बनाई इस दुनिया को देखकर, स्वय ही प्रसन्न होते रहते थे । उस समय लोग आपस में बहस और झगड़ा नहीं करते थे । जीव-जन्तु, पशु-पक्षियों और मानव में कुछ भेदभाव नहीं था ।

धीरे-धीरे मनुष्य अपने को दूसरों से श्रेष्ठ समझने लगे । लोग आपस में लड़ने-झगड़ने लगे । जब भी दो जाति के लोग कहीं मिलते तो वे सोचने लगते कि किस की जाति अधिक उत्तम है ? अपने-अपने गांव में भी जब दो-चार लोग बैठते तो यही सोचते कि एक गाय काली है तो दूसरी भूरी और तीसरी सफेद क्यों ?

Also Read:- MS Dhoni Quotes

एक बार तो उन्हें यह सोचते-सोचते रात से सुबह हो गई कि आग की लपटें कहा जाती हैं ? मनुष्य प्रत्येक बात का उत्तर भगवान से चाहता था, क्योंकि मानव स्वयँ भगवान के पास नहीं जा सकता था, इसलिए वह किसी-न-किसी जानवर को भगवान के पास अपने प्रश्नों सहित भेजता ।

जानवर मनुष्य के झगड़ालू स्वभाव से डरकर चुपचाप उसका आदेश मानते । ऐसी हालत में जानवरों को अनेक ढलानें और चढ़ाइयां पार करनी पड़ती । कभी बड़े-बड़े पत्थर उनका मार्ग रोकते तो कभी नदी-नाले । कहीं तेज हवाओं का उन्हें सामना करना पड़ता तो कहीं बर्फीले तूफानों का ।

एक शाम ऐसी ही बहस छिड़ी । रात के समय सब मनुष्य इकट्‌ठे हुए । उनके मन में यह बात उठी की मनुष्य जब सोता है तो उसका शरीर सोता है या नहीं ? मनुष्य के स्वप्न सच्चे होते है या नहीं ? उनका कोई अर्थ होता है या नहीं ?

बहस बढ़ती हुई देखकर सब जानवर डरकर भाग गए और ऐसी जगह गए कि गांव वाले उन्हें पा न सके । बहस होते-होते जानवर भेजकर इन प्रश्नों का उत्तर भगवान से मंगवाने की बात उठी । मनुष्य ने हर जगह का, लेकिन कोई भी जानवर कहीं भी नहीं मिला ।

केवल एक गिरगिट और छिपकली एक चट्‌टान पर लेटे सूरज की किरणों के इंतजार में मिले । जब मनुष्य को कोई और न मिला तो मजबूरी में उन्होंने गिरगिट और छिपकली को ही भगवान के पास भेजने का निश्चय किया ।

दोनों अपनी यात्रा पर मस्त होकर चल दिए । शुरू-शुरू में उनके पास बहुत-सी प्यारी-जारी बातें करने को थी । उन्हें यात्रा बहुत अच्छी लगी, किंतु धीरे-धीरे जैसे-जैसे दिन ढलने लगा और रात का अंधेरा चारों ओर फैलने लगा, वैसे-वैसे उन्हें यात्रा में मुश्किलें आने लगी ।

डर भी लगने लगा । अंधेरे में वे दोनों बार-बार अपना रास्ता भूल जाते थे । आखिरकार रात के अंतिम पहर में वे दोनों भगवान के पास पहुच ही गए । भगवान ने उनके आने का कारण पूछा । उन दोनों ने जब उन्हें कारण बताया तो कारण जानकर भगवान बहुत नाराज हुए ।

उनकी आखों से अंगारे बरसने लगे । पहाड़ों पर भयंकर आवाजें गूंजने लगी । भगवान उनसे बोले : ”यह मनुष्य इतना पाकर भी खुश नहीं है । बिना किसी कारण के झगड़े और बहस करता रहता है । बार-बार प्रश्न करता है । अब कोई ऐसा उपाय करना पड़ेगा कि तुम लोगों को बार-बार भागकर मेरे पास न आना पड़े ।”

”भगवान! हम ही नहीं, सभी जीव-जन्तु और पशु-पक्षी मनुष्य के इस स्वभाव से दुखी है । कई बार तो हम लोग घंटों तक कहीं-न-कहीं छिपे पड़े रहते है ।”  गिरगिट और छिपकली एक साथ बोले । ”तो आज से पशु-पक्षियों का भी मेरे यहां आना बद किया जाता है । मैं अब मनुष्यों के पास दो संदेश तुम्हारे द्वारा पहुंचा रहा हूं ।

जो संदेश उनके पास पहले पहुंचेगा, वही मनुष्य के अघामी जीवन का फैसला करेगा ।” भगवान छिपकली की ओर मुड़े । बोले : ”छिपकली! तुम्हें यह उत्तर लेकर जाना है कि मनुष्य का दिमाग भी ईश्वर के दिमाग की तरह ही तेज हो जाए । जब वह सोए तो उसे अच्छे-अच्छे स्वप्न आएं ।

स्वप्न में भी उसे उन बातों का पता चले, जो वह नहीं जानता । जब वह उठे तो उसके स्वन सच्चे हो जाएं । उनके गाव में पहले की तरह दूध-दही की नदियां बहती रहें । मेवों के पेड़ हमेशा हरे-भरे रहें । उनका जीवन और भी अधिक शांति और सुख से भर जाए ।”

इसके बाद भगवान गिरगिट की ओर मुड़े और बोले : ”गिरगिट! तुम यह संदेश लेकर जाओ कि हे मनुष्य, तेरे दूध, शहद और मेवों से भरे दिन समाप्त हो गए । अब तुझे अपनी जरूरत के लिए खुद मेहनत करके कमाना होगा । अब तू पड़ोसियों के साथ शांति से नहीं रह पाएगा । तुम लोगों के बीच झगड़े होंगे ।’

छिपकली और गिरगिट भगवान को नमस्कार कर वापस चल पड़े । पहाड़ की उतराई तक तो दोनों साथ-साथ चले, । उतराई के बाद आया रक बड़ा-सा मैदान । मैदान के आते ही छिपकली थकने लगी और धीरे-धीरे वह गिरगिट से पीछे रह गई ।

गिरगिट ने बिना थके अपनी यात्रा जारी रखी । छिपकली इतनी धीरे-धीरे चल रही थी कि कभी तो ऐसा लगता था कि वह चल ही नहीं रही है । जब सूर्य पहाड़ों के पीछे छिप गया तो वह अपने पैरों में सिर दबाकर सो गई ।

अगले दिन शाम ढले थकी-मांदी छिपकली अपने गाव में पहुंची । गांव की पहली झोंपड़ी में जाकर उसने मनुष्य को भगवान का संदेश सुनाया । वहां रहने वाला मनुष्य उस पर हंसने लगा । बोला : ”छिपकली! यहां से चली जाओ । अपने झूठ को लेकर मेरे पास मत आओ ।

अगले गांव में जाकर अपनी झूठी कहानी सुनाओ । शायद वहां तुम्हारी यह झूठी कहानी कोई सुन ले । हमें तो गिरगिट ने सब-कुछ पहले ही साफ-साफ बता दिया है । सुबह से पहले वहा पहुंचो, क्यों कि कल तो हम लड़ाई में मारकर यह सिद्ध कर देंगे कि हम बहुत शक्तिशाली हैं ।

Also Read:- Shahrukh Khan Quotes

हमारे सामने कोई नहीं टिक सकता । हो सकता है वे लोग तुम्हारी बातों में आ जाएं ।” छिपकली ने उदास होकर धीरे-से वह झोपड़ी छोड़ी और अगले गांव की ओर चल पड़ी । जब वह अगले गांव में पहुंची तो उसने गांव के संधिया को अपने हथियार तेज करते हुए देखा ।

फिर भी उसने अपनी ओर से उसे पूरा संदेश सुनाने की कोशिश की, क्षिं उसने भी उसकी बात का विश्वास नहीं किया । वह बोला : ”छिपकली! भाग जा यहां से । मैं सुबह ही इस विषय में गिरगिट से सब-कुछ सुन चुका हूं । हमें बहका मत ।

लगता है, तू दूसरे गाँव के लोगों द्वारा यहाँ भेजी गई है । शायद वे जान गए हैं कि कल सुबह उनकी हार होगी ।” छिपकली ने निराश होकर वह गाँव भी छोड़ दिया और अगले गाँव की ओर चल  पड़ी । वहां पहुंचकर भी उसे मनुष्य द्वारा भर्त्सना सुनने को मिली ।

इसी तरह से एक के बाद दूसरा गाँव घूमती छिपकली कई गांवों में पहुंची, लेकिन वहां गिरगिट पहले ही पहुंच चुका था । छिपकली ने उम्मीद नहीं छोड़ी । आज भी वह एक गांव से दूसरे गांव में इस आशा के साथ भटक रही है कि शायद वह कभी उस स्थान पर पहुँच जाए, जहां के मनुष्यों के पास गिरगिट अभी तक न पहुंचा हो और तब वह उसे भगवान का सही संदेश दे सके ।

भगवान द्वारा बनाई गई यह दुनिया बहुत ही सुँदर है । मनुष्य ही अपने अकरणीय कार्यों से इसे हषइत करता है । मनुष्य को चाहिए कि वह ईश्वर की बनाई इस अनमोल कृति का सम्मान करे । इसके सौंदर्य में वृद्धि करे और प्राणी को अपने जैसा समझकर सबके साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करे ।

By Ruchi

Ruchi is an impassioned motivational writer dedicated to inspiring individuals to unlock their fullest potential and embrace a life of purpose, positivity, and fulfillment. With a profound belief in the transformative power of words, she crafts compelling narratives that ignite hope, instill courage, and spark meaningful change in the lives of her readers.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *